सुमिरव तोर जवानी ल

पहिली सुमिरव मोर घर के मइयां, माथ नवावव धन धन मोर भुइयां I नदियाँ, नरवा, तरिया ल सुमिरव, मैना के गुरतुर बोली हे I मिश्री कस तोर हँसी ठिठोली ल, महर महर माहकत निक बोली हे I डीह,डोगरी,पहार ल सुमिरव, गावव करमा ददरिया I सुवा,पंथी सन ताल मिलालव, जुर मिर के सबो खरतरिहा I जंगल झाड़ी बन ल सुमिरव, पंछी परेवना के मन ल सुमिरव I पुरखा के बनाय रद्दा मा चलबो नवा नवा फेर कहानी ल गढ़बो I पानी ल सुमिरव, दानी ल सुमिरव, बलिदानी तोर कहानी ल सुमिरव…

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तयं काबर रिसाये रे बादर

तयं काबर रिसाये रे बादर तरसत हे हरियाली सूखत हे धरती, अब नई दिखे कमरा,खुमरी, बरसाती I नदियाँ, नरवा, तरिया सुक्खा सुक्खा, खेत परे दनगरा मेंड़ हे जुच्छा I गाँव के गली परगे सुन्ना सुन्ना, नई दिखे अब मेचका जुन्ना जुन्नाI करिया बादर आत हे जात हे, मोर ह अब नाचे बर थररात हेI बिजली भर चमकत हे गड़गड़ गड़गड़, बादर भागत हे सौ कोस हड़बड़ हड़बड़ I सुरुज ह देखौ आगी बरसात हे, अबके सावन ल जेठ बनात हे I कुआँ अऊ बऊली लाहकत लाहकत, चुल्लू भर पानी म…

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