लोक कथा चन्दन के पेड़

एक राज में एक राजा राज करय। राजा के आधा उमर होगे रहय फेर एको झन सन्तान नइ रहय। संतान के बिना राजा-रानी मन ला अपन जिनगी बिरथा लागय। रात-दिन के संसो-फिकर में उखर चेहरा कुम्हलागे रहय। एक दिन राजमहल में एक झन साधू अइस। राजमहल ला निचट सुन्ना देखके अउ रानी के चेहरा देख के ओहा रानी के दुख

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लोक कथा : घंमडी मंत्री

एक राज में एक राजा राज करय। वो राज म अन्न-धन, गौ-लक्ष्मी, कुटुंब-परिवार के भरपूर भंडार रहय, सब परजा मन सुखी रहय। सबो कोती बने सुख संपत्ति रहय। कोन्हों ला कोन्हों किसम के दुख-पीड़ा नई सतावय। एक समे के बात आय। राजा के मंत्री मन ला बहुत घंमड होगे कि वो राज मे उंखर ले जादा बुद्धिमान जीव कोन्हों नइ

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