जतन करव तरिया के

पानी जिनगी के सबले बड़े जरूरत आय।मनखे बर सांस के बाद सबले जरूरी पानी हरे।पानी अनमोल आय।हमर छत्तीसगढ़ म पानी ल सकेले खातिर तरिया,डबरी अउ बवली खनाय के चलन रिहिस।एकर अलावा नरवा,नदिया अउ सरार ले घलो मनखे के निस्तारी होवय। तइहा के मंडल मन ह अपन अउ अपन पुरखा के नाव अमर करे खातिर तरिया डबरी खनवाय।जेकर से गांव के मनखे ल रोजगार मिले के संगे संग अपन निस्तारी बर पानी घलो मिलय। छत्तीसगढ़ मे बेपार अउ निवास करइया बंजारा जाति के मनखे मन जघा-जघा अबड अकन तरिया खनवाय हवय।

एक समे म तरिया ह पूरा गांव के मनखे के जरूरत रहय।नान्हे लइका मन तंउरे बर उंहचे ले सीखय।पार के रुख राई म डंडा पचरंगा खेलय।तरिया पार के पीपर के पीकरी अउ बर के लाहा के झूलना कतको झन ल अभी ले सुरता होही।कातिक नहई के समे तो भीड हो जावय घठौंदा मन म।पीतर पाख म पुरखा ल रोज तरिया म ही तो पानी देथे।कतको झन सियनहा मन सुरूज देव ल कनिहा भर पानी म बूडके अरघ देके पुन्य कमावय। गांव के जम्मो  मनखे नहवई-खोरई से लेके कपड़ा-लत्ता ल उंहे कांचे धोवय।देवी देवता के विसर्जन घलो तरिया म होवे।मरनी-हरनी के कारज म नाहवन के काम अउ अंतिम संस्कार के बाद मरईया मनखे के जम्मो कारज तरिया पार म ही निपटाय जथे।

समे धीरे-धीरे बदलत हे।अब सरकारी योजना के अंतर्गत गांव-गांव मे नल के सुविधा होगे हे।मनखे सरी बुता ल घर भीतर करत हे तेकर सेती अब तरिया के बिनास होवत हे।तरिया म अब मनखे अब नहाय खातिर नी जावय।अब तरिया ह कचरा फेंके के जघा बन गेहे।जम्मो कचरा ल मनखे तरिया म लान के डार देथे।तरिया के पानी अब नहाय के लइक नी रहिगे हे।जब मरनी हरनी के कारज मे नाहवन के बेरा मे नहाय के मजबूरी रथे त मनखे लटपट नहाथे।नहाय के बाद मनखे दोष लगाथे कि तरिया के पानी ले खस्सू खजरी होथे।मनखे अपन करनी ल भूला जथे।तरिया ल घुरवा बना डरे हे तेला।

एक समे म तरिया ह कभू सुन्ना नी रहय।दिनभर गांववाले मन के रेम लगे रहय।कपडा-लत्ता से लेके गाय-गरू के धोवई ह तको तरिया म होवय तभो ले तरिया के पानी ह निरमल रहय।बाद मे सरकार ह निस्तारी तरिया ल मछरी पालन के कारोबार बर दे दिस।मनखे ओमा लालच के मारे आनी बानी के जिनिस डारे के चालू कर दिस जेकर से मछरी भोगावय अउ फयदा जादा मिले किके।उही मेर ले दुरगति चालू होगे तरिया मन के।कतको जघा तरिया ल पाट पाट के घर बनावत हे मनखे ह।

बिन जतन के कोनो भी जिनिस के दुरगति हो जथे।आज तरिया मन घलो उही हालत म हवय।ए तरिया मन छत्तीसगढ़ के धरोहर आय।एला जतने के जरूरत हे।जम्मो मनखे अउ सरकार ल एकर जतन बर उदीम करे के जरूरत हे।नीते एक समे अइसे अही जब लोटा भर पानी म घर भीतर ले पुरखा ल पानी देबर लागही।

रीझे ‘देवनाथ’
टेंगनाबासा (छुरा)

संघरा-मिंझरा

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