तपत कुरू भइ तपत कुरू

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असीस देवे वो
देवारी अउ दुकाल-अकाल
बेटी के बिदा
पन्द्रह अगस्त
मडई देखे जाबो
उँकरे बर सनमान
मडइके के मया
इही किसम होना चाही
तपत कुरु
लछमी – पारवती गोठ
ले दे मोर खर लुगरा
भज लेबे गा
तोरेच खातिर
अन्नपुरना गउरी
सास डोकरी
लेवना चोरी
निक लागय
चन्दा लेहूं
अरझ गेहे
तुलसी के कहिनी
सारी
गुरु नानक
सारा
छत्तीसगढ महतारी
गउरी साँही भउजी
बिजली चमकथय
मोरो मन कहिथय
मैं बुडे हाबँव
दरस नई
नागिन के फन ल
तैय चल
नई बाँचय
तील्मती-चाँउरमती
ढेरा घूमत
चलबों संगे संग
गारव असें
फूल सहीं मुस्कावव
राधा-किसन के चुहुल
चउमास




सरलग पाना नं. [1] [2] [3] [5-6] ‘मया के अमरित’ बरसाने वाली रचनाओं का संग्रह : ”तपत कुरू भइ तपत कुरू” [7-14] आखर दू आखर [15-19] चुम्बकीय व्यक्तित्व : नाभकीय कृतित्व [20-23] आत्म कथ्य [24-30] असीस देबे ओ [31] बेटी के बिदा [32-34] मड़ई देखे जाबो [35-36] मड़ई के मया [37-38] तपत कुरू [39] ले दे मोर बर लुगरा [40] तोरेच खातिर [41] सास डोकरी [42] निक लागय [43] अरझ गेहे [44] सारी [45] सारा [46] गउरी सॉंही भउजी [47] [48] [49] [50] [51-52] [53] [54] [55] [56] [57] [58] [59] [60] [61] [62] [63] [64] [65] [66] [67] [68] [69] [70] [71] [72] [73] [74] [75-80] [80-81] [82] [83] [84-85] [86] [87-88] [89] [84]


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