विष्णुपद: छंद – मोखारी

बबा लाय हे दतवन नोनी,दाँत बने घँसबो !
जीभ सीप के कुल्ला करबो,कुची फेंक हँसबो !!1!!

बनतुलसा बर बोइर बमरी,टोर लन चिरचिरा !
करंच मउहाँ सब्बो दतवन,लीम हे किरकिरा !!2!!

बमरी सोंटा के मोखारी,गाँव-गाँव चलथे !
घड़ी-घड़ी मा खेलत खावत,आज कल निकलथे !!3!!

हँसिया बाँधै डँगनी धरके,दतवन अभी मिलही !
लाम छँड़ा ला टोरै सब्बो,दाँत तभे खिलही !!4!!

नवा जमाना धरके आगे,टूथ ब्रस घँसरबे !
टूथ पेस्ट तो रइथे बढ़िया,देख तहूँ फँसबे !!5!!

मजा कहाँ जी दतवन जइसन,करू लीम बमरी !
दाई बाबू माँगत हावै,चलना जी लमरी !!6!!

बैकटेरिया मरथे नोनी,बढ़िया मुँह लगथे !
साफ दाँत तो दिखथे चकचक,बदबू हर भगथे !!7!!

सुरता बढ़थे बमरी घँसले,यहू बुता करले !
आवाज मधुर बोइर करथे,ध्यान यहू धरले !!8!!

नैन जोति तो बढ़थे बर ले, श्वेत प्रदर हँटथे !
रक्त प्रदर के नाशक होथे,केत बने मिटथे !!9!!

दतवन के अब देखव जादू, घर-घर सुख लमरे !
लाख बिमारी नाशक बनके,मेटे बर टमरे !!10!!

मूत्र रोग अउ पथरी स्वाँसा,दाँत सेंध्द हिलना !
मुँह के छाला अउ पायरिया,सबला हे मिटना !!11!!

पेट चेहरा बढ़िया सेहत,झुमरत मन करले !
कफ ब्लड प्रेशर जाही सबके,गाँठ बाँध धरले !!12!!

अइसन होथे जी मोखारी,जादू बड़ चलथे !
देश मोर तो घँसथे दतवन,केत हाँथ मलथे !!13!!

असकरन दास जोगी
मो.नं.: 9340031332

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