जगत गुरू स्वामी विवेकानन्द जी महराज के जीवन्त संदेश, मंत्र औ समझाईस

राजभाषा छत्तीसगढ़ी मा
काव्यात्मक प्रवर्तक- आचार्य हर्षवर्धन तिवारी
पूर्व कुलपति, अध्यक्ष-ए.एफ.आर.सी., म.प्र.

ए सुरता मा के स्वामी जी महराज अपन लईकई के दू साल छत्तीसगढ़ के रायपुर मा बिताईस छत्तीसगढ़ के जंगल के रास्ता ल बैलगाड़ी मा पार करत अपन जीवन के आध्यात्म के सबसे पहली अनुभूति ल पाईस ओकरे सेती ओकर जिन्दगानी के किताब म छत्तीसगढ ल ओकर अध्यात्मिक पैदाईस के जनमभूमि लिखेगे हे। फेर मैं चाईहौं के छत्तीसगढ़ के लइका लोग मन जिंदगानी भर सुरता राखंय ओकर उपदेष उद्गार ल अपन जिंदगानी म अपनाय बर औ सुकता राखे बर के ऐतका बड़ महापुरूष के छत्तीसगढ़ ह अध्यात्मिक पैदाई के जघा ये यई माटी के पैदाइस ये जेमा तुम मन जन्मे। औ ओकर उपदेस ह हमर करतब ये छत्तीसगढ़ महतारी बर ।




संघरा-मिंझरा

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