प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – कृषि संबंधी प्रक्रियाएँ

छत्तीसगढ़ी में कृषि संबंधी प्रक्रियाएँ, जैसे – खातू पलई, खेत जोतई, बोनी, पलोई, बियासी, निंदई-कोड़ई, रोपा, रोपई, दवई डरई, लुवई, डोरी बरई, करपा गंजई, बीड़ा बंधई, भारा बंधई, खरही गंजई, पैर डरई, मिंजई, खोवई, ओसई, नपई, धरई, कोठी छबई, बियारा छोलई, लिपई, बहरई, बसूला/राँपा / बिन्हा/टंगिया/हँसिया टेवई, बेंठ धरई, कलारी चलई, पैर खोवई, पैरावट लहुटई, पैर गंजइ।

फसलों की विभिन्न स्थितियाँ– जरई आगे, जामत हे, धान केंवची हे, दूध भरावत हे, पोटरिया गे, भरा गे, बाली आवथे, पोठा गे, पोक्खा-पोक्खा होगे, पोचलियावत है, बदरा पर गे, माहो लग गे, पाकत हे, सूखा गे, मुठियाए के लईक होगे, लूए के लाइक हो गे, लूवा गे, करपा माढे़ हे, बिडि़या गे, बोझा डोहरा गे, खरही गंजा गे, पैर डरा गे, मिंजा गे, उड़ा गे, धरा गे, कोठी छबागे)

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शोधार्थी – राजेन्‍द्र कुमार काले, रायपुर. निदेशक – चित्‍तरंजन कर

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संघरा-मिंझरा

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